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Sunday, December 31, 2017

5 हर पल सद्गुरु को रहता है अपने भक्तों का ध्यान

 उस समय स्वामीजी का एक चातुर्मास तुंगभद्रा नदी के किनारे बसे श्री क्षेत्र हवनुर में था, महाराष्ट्र से वहाँ जाते समय धारवाड़ जिले के अंतर्गत हवेरी नामक स्टेशन लगता है.  धारवाड़ जिले में उस समय अधिकांशतः: कन्नड़ लोग रहते थे और मराठी जानने वाले तो ढूंढे नहीं मिलते थे.
स्वामीजी के दर्शन के लिए एक मराठी लोगों का एक जत्था  महाराष्ट्र से निकलता है. उन लोगो के साथ सबसे बड़ी समस्या थी भाषा की, किसी से कुछ भी पूछने पर कन्नड़ भाषा में न समझ में आने वाला  उत्तर मिलता था.
 तभी हवेरी स्टेशन पर नियुक्त एक महाराष्ट्रीयन स्टेशन मास्टर उन लोगों के पास स्वयं आकर कहते है :- “श्री के दर्शन के लिए जा रहे है क्या?”